वन्य जीव संरक्षण के उपाय By – StudyThink

पर्यावरण प्रदूषण पर प्रभावी रोक क्रिएट पशुओं एवं वन्य जीव का संरक्षण आवश्यक है क्योंकि इनके द्वारा पर्यावरण में बहुत से प्रदूषित पदार्थों को नष्ट कर दिया जाता है। इसके साथ ही हुए पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में अपनी अमूल्य योगदान देते हैं।

जीव संरक्षण के उपाय कुछ इस प्रकार हैं

हमारे देश में अनेक प्रकार के वन्य जीव पाए जाते हैं। जैसे कि उचित संरक्षण ना हो पाने के कारण उनकी अनेक प्रजातियां या तो नष्ट हो चुकी हैं, अथवा क्या है इसी कारण देश की जय विविधता की सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास आवश्यक है जिनमें से कुछ इस प्रकार है आइए हम यह जाने-

1.

संकटापन्न वन्यजीवों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

2.

इस विषय में नवीनतम स्थिति तथा प्रवृत्तियों की जानकारी के लिए पशु गणना को गति प्रदान करनी चाहिए।

3.

इनके संरक्षण के लिए जीव आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना में और वृद्धि की जानी चाहिए। वर्तमान में जैव विविधता के संरक्षण के लिए 12 जीव आरक्षित क्षेत्र स्थापित किए गए जो पर्याप्त नहीं है।

नीलगिरी उत्तरांचल के हिमालय पर्वत क्षेत्र में नंदा देवी मेघालय में नोकरेक पश्चिमी बंगाल में सुंदरवन उड़ीसा में सिंपलीपाल तथा अंडमान निकोबार दीप समूह में जीव आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना हो चुकी है। इस योजना में भारत के विविध प्रकार की जलवायु वाले तथा विविध वनस्पति वाले क्षेत्रों को सम्मिलित कर इन के क्षेत्र में वृद्धि की जाए।

4.

अरुणाचल प्रदेश में पूर्वी हिमालय क्षेत्र तमिलनाडु में मन्नार की खाड़ी राजस्थान में थार का मरुस्थल गुजरात में कच्छ का रण को आरक्षित क्षेत्र बनाए जाने के प्रस्ताव अभी केवल विचाराधीन है। अतः इन पर शीघ्र निर्णय कर इनका विकास किया जाना चाहिए।

5.

असम में डांडिया और हाथियों का प्राकृतिक आवास है अतः यहां इनके संरक्षण हेतु काजीरंगा तथा मानस अभ्यारण का विकास किया जा चुका है इसी प्रकार जीवों का संरक्षण भी किया जाना चाहिए इन्हें कृत्रिम रूप से अन्य स्थानों पर जीवित रहने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।

6.

जिओ आरक्षित क्षेत्रों में वन्य भूमि जीव-जंतुओं तथा वनस्पति को उनके मूल प्राकृतिक रूप में संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए।

7.

जीव संरक्षित क्षेत्रों एवं इनके निकटवर्ती भागों का उपयोग वन्य तथा अन्य उत्पादों के विकास के शोध केंद्रों के रूप में किया जाना चाहिए सरकार ने वन्यजीवों को बहुत देश की उपयोगिता को देखते हुए इनके शिकार पर प्रबंध लगा दिया है और इनकी सुरक्षा के लिए वन्यजीव आभार यारों की स्थापना की गई है।

वन्य जीव संरक्षण हेतु भारत में 88490 पक्षी विहार तथा 27 टाइगर रिजर्व है जो देश के सकल भगौली क्षेत्र का एक दशमलव 5300000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल घेरे हुए है अतः ऐसे प्रतीत होता है

कि हमारी सरकार जीव संरक्षण हेतु वास्तव में प्रयासरत है परंतु इसके लिए जन सहयोग भी बहुत आवश्यक है इसलिए हम सब लोगों को भी जीवो के लिए कुछ ना कुछ करना चाहिए और उनकी सुरक्षा करना चाहिए।

जल हमारे लिए क्या है आइए हम आज जल के बारे में जानें

जल हमारी प्राथमिक आवश्यकता है।जल के बिना हम जीवित नहीं रह सकते। अतः जल ही जीवन है तथा उसका संरक्षण किया जाना नितांत आवश्यक है इसके संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं।

जल का भंडारण

भू पृष्ठ पर होने वाली वर्षा से प्राप्त जल के प्रवाह को नियंत्रित कर जलाशयों में एकत्र किया जाना चाहिए जिससे उसका उपयोग अधिक समय तक किया जा सके। इस सतह पर यदि वनस्पति का आवरण हो तो जल रिस रिस कर भूमि में प्रवेश कर भूमिगत जल का रूप धारण कर लेता है इस में भूमिगत जल स्तर में वृद्धि होती है।

भूमिगत जल का विवेकपूर्ण उपयोग

पृथ्वी पर अधिकांश जल की आपूर्ति भूमिगत जल द्वारा ही होती है अतः इसका विवेकपूर्ण उपयोग वर्षा के जल की कमी को पूरा कर सकता है। विश्व के अधिकांश भागों में भूमिगत जल का प्रयोग सिंचाई के रूप में किया जाता है

भूमिगत जल का विवेकपूर्ण उपयोग तभी माना जाता है जब एक और उसका दोहन किया जाए तथा दूसरी ओर वर्षा के लिए भूमि को अंदर जाने को बाध्य किया जाए। इसके लिए सता पर अधिक से अधिक वृक्षारोपण तथा रेन हार्वेस्टिंग तकनीकी का उपयोग किया जाना चाहिए।

जल को प्रदूषण से बचाना—

जल को सर्वाधिक खतरा प्रदूषण से है मानव ने जल की अगाध स्रोतों को प्रदूषित करना प्रारंभ कर दिया है समुद्रों में तेल टैंकरों से होने वाले रिसाव विषैले पदार्थ के विसर्जन दमोह के परीक्षण घरेलू योगिक कचरे के निस्तारण आदि से जल प्रदूषण की स्थिति दिनोंदिन भयंकर होती जा रही है।

जल प्रदूषण की स्थिति संघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों में छाया हुआ है। अतः यह प्रयास करना चाहिए कि स्वच्छ जल में विषैले पदार्थों को विसर्जित ना किए जाए इसके लिए बड़े कानून बनाकर उन पर अमल किया जाना चाहिए अनेक देशों के जल विधान में यह प्रावधान तो किया है कि जल को प्रदूषित करने वाले को दंड दिया जाए

परंतु उसका कड़ाई से पालन नहीं किया जाता भारतवर्ष ऐसे देशों में एक है अभी हाल में फ्रांस ने साबिर क्षेत्रों में बमों का परीक्षण कर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है।

कृत्रिम वर्षा

कृतिम वर्षा द्वारा भी जल का संरक्षण किया जा सकता है परंतु इसकी तकनीक महंगी है कृत्रिम वर्षा में वायुमंडल में सिल्वर आयोडाइड केकड़ी खेलने पड़ते हैं जो आद्रता ग्राही नाभि को किस रचना में मदद करते हैं।

इसके वर्षा करने में सहायता मिलती है संयुक्त राज्य अमेरिका में कोलोरेडो पठार पर इस प्रकार की वर्षा करने के प्रयास किए गए हैं।

पेयजल का परीक्षण

घरों में आपूर्ति किए जाने वाले पेय जल का परीक्षण करते रहना चाहिए इसके लिए नमूने एकत्रित करके जांच कराते रहना चाहिए सिंचाई में प्रयोग किए जाने वाले जल की भी जांच होनी चाहिए इससे मिट्टी के प्रदूषण को भी रोकने में सहायता मिलती है।

अशुद्ध जल का शुद्धिकरण कैसे करें

जिन जिन भागों में अशुद्ध जल पाया जाता है उसका उपयोग शुद्धिकरण के पश्चात ही किया जाना सिरस्कर होता है असद जल को शोधित करने की कई विधियां हैं

यदि नदियों में अपशिष्ट पदार्थ युक्त जल को नदी के स्वच्छ जल में मिलने से पूर्व ही शोधित कर लिया जाए तो नदी के जल को प्रदूषित से बचाया जा सकता है।

जब नदी के जल में हानिकारक पदार्थों की मात्रा निश्चित मानक से अधिक बढ़ जाती है तो नदी के अंदर रहने वाले जीवो का ऑक्सीजन की कमी अनुभव होने लगती है इस विशेषता को जैविक में ऑक्सीजन मांग कहते हैं।

बी ओ डी की कमी से जलीय जीव मारकर जल को और अधिक प्रदूषित कर देते हैं। अपशिष्ट जल के शोधन की अनेक विधियां हैं जिनमें भौतिक रासायनिक विधि यांत्रिक विधि तथा जैविक शोधन विधि महत्वपूर्ण हैं।

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